आदर्श आज बहुत खुश है क्योंकि उसे एक नया खेल मिला है, दो अलग- अलग रंग के डब्बे I आदर्श रंग पहचानता है इसलिए उसे पता है की एक का रंग नीला है और दूसरे का हरा I उसकी माँ ने उसे घर के कचरे को इन डब्बों में डालने के लिए कहा I माँ के कहे अनुसार आदर्श ने फल सब्जी के छिलके हरे कूड़ेदान में और कागज़, प्लास्टिक की पन्नी, टॉफी का रैपर नीले कूड़ेदान में डाला I माँ ने बताया है की आज कचरे वाला दोनों डब्बों के कचरे को अलग- अलग ले जायेगा अब इसे इकठा मत करना I आदर्श इंतजार में है I और इंतजार में है वे 4000 से अधिक नगर निकायों की जनता को जो आजकल टी. वी., अख़बार आदि में प्रतिदिन एक विज्ञापन देखती है - 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ब्लू – ग्रीन शपथ लें कि घर के कचरे को अलग – अलग कूड़ेदान में डालेंगे और देश में स्वच्छ्ता अभियान में अपना योगदान देंगे I कई नगर निकायों ने तो बड़े- बड़े होर्डिंग, विज्ञापन लगाकर इसका खूब प्रचार- प्रसार भी किया है I नीति- निर्धारक भी किसी न किसी नगर निगम में जाकर इस अभियान का शुभारम्भ करेंगे और ब्लू- ग्रीन शपथ दिलवाएँगे I 4000 से अधिक नगर निकायों में एक साथ इस अभियान की शुरुआत करने के पीछे एक मंशा यह भी है की शायद वर्ल्ड रिकॉर्ड बन जाये, वाह-वाही मिले और नीति निर्धारक अपनी पीठ थपथापयें I लेकिन ज़मीनी हकीक़त इससे कितना मेल खाती है इसके कुछ उदहारण प्रत्यक्ष हैं I अजमेर नगर निगम पृथक कचरे को कैसे डंप किया जायेगा और इसका कैसे उपचार होगा? कौन करेगा? यही तय नहीं कर पाया I इसलिए इस अभियान को लेकर उदासीन है I यहाँ पर हमें यह भी ध्यान में रखना होगा की अजमेर स्मार्ट शहर भी है I शिमला नगर निगम ने तो लगभग 4-5 वर्ष पहले ही दो रंग के कूड़ेदान वितरित कर दिए थे – एक हरा, दूसरा पीला I और अब स्वच्छ भारत मिशन के मंत्रालय के आदेशानुसार शिमला में भी ब्लू-ग्रीन शपथ को लेकर, और कचरा ब्लू-ग्रीन कूड़ेदान में डालने के लिए खूब प्रचार-प्रसार हो रहा है I बस जनता परेशान है और पीले में नीला रंग ढूंड रही है I अधिकांश नगर निकायों ने तो अभी तक कचरापात्रों का प्रोक्योरमेंट भी नहीं किया है I लेकिन शायद ब्लू- ग्रीन शपथ दिलवाकर, हस्ताक्षर अभियान चलाकर अभियान की खाना-पूर्ति कर ही देंगे I जहाँ पर कूड़ेदान बाँट दिए गए हैं, वहां कुछ नगर- निकायों को छोड़कर भण्डारण और प्रसन्स्करण की सुविधा ही नहीं है I बिना पुर्वनियोजन के आगे बढ़ जाना हमारी सरकारों की परमम्परा रही है I इस अभियान का क्या परिणाम होगा यह तो वक़्त ही बताएगा किन्तु आमजन में एक उत्साह है I किसी न किसी रूप में प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छ भारत अभियान में अपना योगदान देने के लिए उत्साहित है किन्तु सरकारों को योजना निर्माण और उनके क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना होगा I ऐसा न हो की 5 जून के बाद हम किसी और अंतर्राष्ट्रीय दिवस के लिए कोई नया अभियान तय करें और ऐसे ही आगे बढते रहें I आज यह नितांत आवश्यक है की सरकारों और जनता के बीच के फासले को कम किया जाये, स्थानीय समाधान लोगों के साथ और उनके स्थानीय ज्ञान के आधार पर तय हों, निरंतर बातचीत के अवसर पैदा किये जायें I आदर्श के सपनों के लिए यही आदर्श स्थिति होगी I

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