अश्लील गाने क्या बंद हो सकते है? क्युकी मेरा काम के रस्ते में तो ऑटो भी आता है जिसमे चलने वाले गाने मुझे बिलकुल पसंद नहीं है|
महिलाओ ने सवाल किये की खेत में काम करने वाली महिलाओ को सुरक्षा कैसे मिलेगी, क्या सिर्फ गाली देने पर केस किया जा सकता है ? क्या फ़ोन पर बदतमीजी करने वालो को भी इसमें रखा जा सकता है ? लड़कियों के साथ ये घटनाये बहुत आम है| सवाल ईट भट्टो में बने खुले स्नान घर पर भी उठे जो की महिला मजदूरों की मज़बूरी है और यौन उत्पीड़न की वजह भी, जिसपर कोई बात नहीं करना चाहता|
ये सवाल हमारे आर्थिक वर्ग से विभाजित समाज की भी झलक देता है, गाली वो देता है जो मजदूरी देकर हम पर एहसान करता है वरना खायेंगे क्या और जियेंगे कैसे? इतना तो सहन करना ही पड़ेगा | इस सोच को बदलने के लिए हमने कुछ स्थानीय साथियों को अपने साथ जोड़ा जो की स्थानीय स्तर पर इस विषय पर बात कर सके |यात्रा के दुसरे चरण मेंचुने हुए साथियों को दुबारा ट्रेनिंग मिली ताकि वो इस विषय को गहराई से समझ सके | इन साथियों को हमने चैंपियन कहा, चैंपियन वो होता है जिसकी अपने काम में अच्छी पकड़ हो और उसे कुशलता से निभा सके | ये चैंपियंस वो आवाज़ है जिसके ज़रिये हमारा संवाद लोगो से हो रहा है और हम असंगठित कार्यस्थलो में यौन उत्पीड़न पर एक समझ बना रहे है और आगे जिसके जरिये हम सरकारी तन्त्र को कार्यरत करेंगे |
बदलाव के लिए यात्रा
बदलाव यात्रा – एक ऐसा सफ़र
जिसका मकसद है रुढी ढाचो को ललकारना
हमारे कार्यस्थलो में एक अजीब सी मायूसी है,
ये यात्रा है उस मायूसी को दूर करने के लिए
ये एक लड़ाई का आगाज़ है,
रोजमर्रा में हो रहे यौन उत्पीड़न के खिलाफ़
ये यात्रा मांग करती है, आज़ादी की
आज़ादी आत्म-सम्मान से रोटी कमाने की
ये यात्रा मांग करती है ईट भट्टियों में
दरवाज़ा बंद शौचालयों और स्नान घरो की
ये कहती है कार्यस्थलो पर अश्लील संवाद बंद हो
ये यात्रा झटकना चाहती है, उन सभी हाथो को
जो महिला कामगारों को अनचाहे छूना चाहते है
हम बढ़ चले है ताकि चुप्पी को आवाज़ मिले
हम निकले है ताकि बंद सिस्टम की चाभी चल पड़े
ये कोशिश है सभी को जगाने की और इस लड़ाई में शामिल करने की
बदलाव के लिए ज़रूरी है सुरक्षित वातावरण सभी कार्यस्थलो में
ये यात्रा है एक बेहतर कल के लिए , ये सुनिश्चित करने के लिए की
असंगठित कार्यस्थल में, यौन उत्पीड़न से महिलाओ को सुरक्षा मिले.
महिलाओ को उनके कार्यस्थलो में उचित सम्मान मिले |
This reflection on the Reimagining Civil Society podcast episode, “Learning for Self-Care: Preventive Health,” highlights the vital role of civil society organizations in advancing community-led health initiatives. Featuring insights from Dr. Rajesh Tandon, it emphasizes preventive healthcare, local knowledge, and grassroots action as essential pathways toward healthier, more resilient communities.
Between Knowledge and Development: Reflections on Change Among the Korwa (PVTG) of Garhwa, Jharkhand
This reflective blog explores the changing realities of the Korwa, a Particularly Vulnerable Tribal Group (PVTG) in Garhwa, Jharkhand. Through conversations with community members, it examines the intersection of development, education, traditional knowledge, and cultural identity, highlighting the need to value Indigenous knowledge systems alongside modern development pathways.
This blog explores mobility challenges faced by women in Vypin, Kochi, highlighting how infrastructure alone does not ensure equitable access. It underscores the need to integrate participatory approaches with implementation for inclusive and meaningful development outcomes.